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बीजेपी के अपने ही सांसद अनसुनी कर रहे हैं मोदी की अपील, ऐसे किस मुंह से जनता से वोट मांगेगी बीजेपी

आज प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता में आए यूँ तो लगभग 4 साल का लम्बा वक्त हो चला हैं लेकिन जनता से किये सभी वायदे अभी भी जस-के-तस कागज़ों में ही नज़र आ रहे है. जिसके चलते साफ़ तौर पर जहाँ पहले देश की जनता का रुख बीजेपी से बदलता दिख रहा था वहीं अब खुद बीजेपी के कई नेता और मंत्री मोदी जी के खिलाफ खड़े हो चले है.

बीजेपी के 80 फीसदी सांसद नहीं दिखा रहे हैं मोदी की योजना में दिलचस्पी

जी हाँ मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो देश के लगभग 80 फीसदी सांसदों ने पीएम मोदी की एक अपील को नजरअंदाज-सा करते हुए ये दिखा दिया कि केंद्र सरकार से अब उनके ही मंत्री खफ़ा है.

मोदी की इस मुख्य अपील को उनकी के सांसदों ने किया नजरअंदाज

*-दरअसल, पीएम ने प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद देश के सभी सांसदों से मई 2019 तक सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 3 गांव विकसित करने की अपील की थी.

*-लेकिन अब टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये सामने आया कि अब तक मात्र 19 फीसदी सांसदों ने ही इस योजना के तहत तीन गांवों को चुना है.

*-जबकि 88 फीसदी सांसदों ने एक गांव को गोद लिया है, और 59 फीसदी सांसद दो गांवों को इस योजना के तहत चुन चुके हैं.

लाखों गाँव में से महज 1314 गांवों का ही हुआ चुनाव

रिपोर्ट में ये भी साफ़ हुआ कि, अपील के बाद अब तक सिर्फ 1314 गांवों को चिह्नित किया गया है जहाँ इतने समय बीतने के बाद भी महज 42 फीसदी काम ही पूरा हुआ है. योजना को पूरा करने में इतनी देरी को देखते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने निराशा जताते हुए खुद राज्य के मुख्यमंत्रियों और सांसदों को चिट्ठी लिखकर अपील की है कि,

“वह जल्द विकास के लिए गांवों को चिह्नित करें और पीएम के टारगेट को हासिल करें.”

बीजेपी के खुद के सांसदों का ही  प्रधानमंत्री की इस योजना में ही फीका रवैया

सबसे हैरान करने वाली बात जो इस योजना में सामने आई हैं वो ये हैं कि इस योजना के तहत ऐसा नहीं हैं कि केवल विपक्षी दलों के सांसद ही अपना बेहद फीका रवैया दिखा रहे हैं बल्कि बीजेपी के सांसद भी पीएम की इस ख़ास योजना में दिलचस्पी नही लेते नज़र आ रहे है.source

4 साल के बाद भी अभी 50 फीसदी भी काम नही हुआ पूरा

जानकारी के लिए बता दें कि देश भर से लगभग 191 बीजेपी सांसदों ने अब तक इस योजना के तहत तीसरे गांव का चयन नहीं किया है, जबकि 84 सांसदों ने अभी तक दूसरे भी गांव का चयन नहीं किया है. महज राज्यसभा के 12 बीजेपी सांसदों ने ही इस योजना के तहत तीनों गांवों को विकास के लिए चुना है.

हाँ बीजेपी ये बोलकर जरुर खुद को दिलासा दे सकती हैं कि तीन में से उसके सांसदों में एक तो गाँव चुक ही लिया है.

2019 में किस मुंह से बीजेपी मांगेगी वोट

याद हो तो पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद 11 अक्टूबर 2014 को महत्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत करते हुए सभी सांसदों को 2019 तक तीन गांवों में बुनियादी और संस्थागत ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई थी.source

काम पूरा करने की बजाय सांसद लगा रहे हैं बहाना

मोदी साहब ने सांसदों को तीन में से एक आदर्श गांव 2016 तक विकसित करने का लक्ष्य दिया था. ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने इस मामले पर अधिक जानकारी देते हुए बताया कि,

“चुकी 2019 चुनाव आने वाले हैं जिसके चलते सांसदों को पत्र लिखकर इस काम को जल्द पूरा करने को कहा जा रहा है, लेकिन सांसद काम पूरा करने की बजाय इसके लिए राजनीतिक कारणों का हवाला दे रहे हैं. बीजेपी के सभी सांसदों का कहना है कि एक गांव को चुनने से दूसरे गांव के लोगों की नाराज होने की संभावना रहती है. लिहाजा, ऐसा बहुत सावधानी से करना पड़ता है.”

4 साल में भी नहीं बदली प्रधानमंत्री के गाँव की सूरत

जो प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आते ही देश के सभी गाँवों की सूरत बदलने का दावा कर रहे थे उनके ही सांसदों ने ये दिखा दिया कि “गाँव की सूरत बदली है” कहने भर से असल सूरत नहीं बदल सकती.

नोट: दोस्तों क्या इसका ख़ामियाज़ा पीएम मोदी को लोकसभा चुनावों में भुगतना  पड़ सकता है? हमे नीचे कमेंट कर अपनी राय दें और इस खबर को शेयर भी करे.

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