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शव को जलाते वक्त आखिर क्यों बाधे जाते हैं मृतक के हाथ-पैर..? कारण जानकार किसी भी शव के पास नही होंगे खड़े

हिन्दू धर्म के अनुसार धरती को म्र्तियुलोक कहा जाता है क्योकि मृत्यु एक कडवी सच्चाई है जीवन की| हिन्दू धर्म में गरुण पुराण एक ऐसा ग्रन्थ है जो बताता है की मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है| जब व्यक्ति मरने वाला होता है तो वो कुछ कह नही पाता, केवल मुह से झाग या लार ही निकल रही होती है| ऐसा माना जाता है की उस दौरान यम के दूत उसके सामने वह मौजूद होते है जो उसे ले जाने आये होते है| मरने के बाद उस व्यक्ति के शरीर से अंगूठे के साइज़ की आत्मा निकलती है और यमलोक जाने का सफ़र तय करती है|source

मरने के बाद आत्मा को करना होता हैं 47 दिनों का सफ़र तय

लेकिन अगर उस व्यक्ति के परिजन ठीक से पिंडदान आदि नहीं करते तो उस आत्मा की बेहद दुर्गति होती है| मरने के बाद आत्मा 47 दिन का सफ़र कर यमलोक पहुचती है जिस दौरान यम के दूत उस आत्मा को यमलोक के बारे में बताते है| वहां पहुचने के बाद यमराज उस व्यक्ति के द्वारा किये गये पाप कर्मो का लेखा जोखा बताते है और सजा तय करते है|

ऐसा कहा जाता है की अगर व्यक्ति का सही से पिंड दान आदि न कराया जाए तो वो भूख प्यास से पीड़ित, सुनसान जंगलो में प्रेत बनकर घूमता है| तो चलिए आपको बताते है मृत व्यक्ति के जलाने से लेकर पिंड दान आदि की क्रिया और इसकी विशेषता|source

क्यों रहती है लोगो को अंतिम संस्कार की जल्दी?

जब भी मृत व्यक्ति का शरीर घर पे रहता है तो कोई भी शुभ कार्य नही हो सकता है, कोई भी स्नान नही कर सकता| घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता, इसलिए लोगो को जल्दी रहती है की वो शव का अंतिम संस्कार जल्दी से जल्दी करे| जब तक अंतिम संस्कार नही होता तब तक लोग उसके मृतक शरीर की देखभाल करते है क्योकि अगर किसी जानवर ने उस शरीर को छू लिया तो उसकी दुर्गति निश्चित है|

क्यों बांधे जाते है लाश के हाथ और पैर?

अंतिम संस्कार करने का फायदा मृतक के घरवालो और मृतक दोनों को होता है| पापी व्यक्ति के ठीक से अंतिम संस्कार करने पर उसकी दुर्गति नही होती| जलाने से पूर्व घर और रास्ते में पिंडदान करने से देवता और पिशाच दोनों खुश होते है और लाश पूरी तरह से आग्नि में समां जाने के लिए तैयार रहती है| जलने के दौरान लाश के हाथ और पैर दोनों बांधे जाते है ताकि उसमे किसी पिशाच का कब्जा न हो जाये|source

सूर्यास्त के बाद नही होता दाह संस्कार

हिन्दू धर्म के सूर्यास्त के बाद कभी भी दाह संस्कार करने से साफ़ मन किया गया है क्योकि ऐसा करने से मृत व्यक्ति को परलोक में तकलीफ होती है और अगले जन्म में उसके शरीर के किसी अंग में दोष हो सकता है|

नोट: दोस्तों क्या आपको ये जानकारी पहले पता थी? हमे अपनी राय नीचे कमेंट कर जरुर दें और इस खबर को भी शेयर करे.

 

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