≡ Menu

कर्नाटक चुनवों से ठीक पहले मणिपुर में गिरेगी बीजेपी सरकार, जानिये कैसे…?

जब मामला तानाशाही का हो तो बगावत होना लाज़मी ही है फिर चाहे वो राजनीति हो या कोई और क्षेत्र| फिलहाल तो यहाँ राजनीति के मैदान की ही बात होगी जहा मणिपुर के सीएम एन.बीरेन सिंह ने अपने मंत्रियों को स्वतः काम नही करने दिया और उनके काम में हस्तक्षेप करते रहे| नतीजा: मंत्रियो ने उनके हाथ में इस्तीफ़ा थमा दिया|source

यह बात जब दिल्ली आ पहुंची तो पार्टी को करारा झटका लगा क्योकि पहले से ही बीजेपी वहां गठबंधन की सरकार बना के बैठी है जिसे उसे किसी भी हालत में 2019 तक संभालना है|

मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने दिखाई तानाशाही

मणिपुर में गठित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत गठबंधन सरकार को तब जोर का झटका लगा जब वरिष्ठ स्वास्थ्य मंत्री समेत कई मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया| स्वास्थ्य मंत्री एल.जयंतकुमार ने आरोप लगाया की मुख्यमंत्री उनके कार्यो में हस्तक्षेप कर रहे है| जयंतकुमार   के पास स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ तीन और विभाग भी थे|source

इस्तीफे की वजह थी मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य निदेशक ओकराम इबोमचा को बिना स्वास्थ्य मंत्री एल.जयंतकुमार से पूछे निलंबित कर देना| गौरतलब है की मुख्यमंत्री के पास कार्मिक मंत्रालय भी है जिस कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया| आपको बता दे जयंतकुमार नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के उन चार विधायको में से एक है जिन्होंने 15 मार्च को बीजेपी नेत्रत्व वाली गठबंधन सरकार में शपथ ली|

क्या कहा गया है इस्तीफ़ा पत्र में?

इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि उन्हें मंत्री बनाने के लिए वह मुख्यमंत्री के शुक्रगुजार हैं, लेकिन अपने काम में ‘दखलंदाजी’ के कारण वह अपने पद पर बने रहने में सक्षम नहीं हैं|

source

सूत्रों का कहना है कि एनपीपी के कुछ अन्य विधायक, जिन्हें मंत्री बनाया गया है, वो भी अपने विभाग को लेकर नाखुश हैं| उरीपोक से एनपीपी विधायक तथा पूर्व पुलिस महानिदेशक वाई.जॉयकुमार कथित तौर पर गृह मंत्रालय चाहते थे, जो उग्रवादग्रस्त मणिपुर में महत्वपूर्ण है|source

एक के बाद एक मंत्री दे रहे हैं इस्तीफ़ा

लेकिन मुख्यमंत्री ने गृह विभाग अपने पास रखा है| जॉयकुमार राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं| बीजेपी गठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल ने 15 मार्च को शपथ ली थी| बीजेपी, एनपीपी, नागा पीपुल्स फ्रंट, एलजेपी तथा कांग्रेस (पाला बदलने वाले) के नौ विधायकों का मंत्रिमंडल में शामिल किया गया| 23 मार्च को तीन अन्य ने मंत्री पद तथा 12 अन्य ने संसदीय सचिव के रूप में शपथ ली थी| गौरतलब है कि पार्टी में इस तरह की तानाशाही के चलते मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया|

 नोट: पार्टी नेताओ की ऐसी तानाशाही का बदला क्या बीजेपी को 2019 के चुनावों में भुगतना पड़ेगा? अपनी राय हमे नीचे कमेंट कर जरुर दें और इस खबर को भी शेयर करे.

Related Posts

{ 0 comments… add one }

Leave a Comment