≡ Menu

भारत के पहले प्रधानमंत्री बरकतुल्ला खान जिन्हें इतिहास ने भुला दिया, कहानी जानकार आप हैरान रह जाएँगे

जब भी आपसे यह सवाल किया जाता है की देश का पहला प्रधानमन्त्री कौन था तो नाम आता है पंडित जवाहरलाल नेहरु| लेकिन यह नाम भारत के प्रधानमंत्री की फेहरिस्त में आजादी के बाद आता है जबकि इतिहास में एक और नाम दर्ज है जो आजादी के पहले था| भारत की आजादी के पहले न सिर्फ प्रधानमंत्री हुए थे बल्कि राष्ट्रपति भी बने थे|source

धर्मनिरपेक्ष हिंदुस्तान के पहले मुस्लिम प्रधानमन्त्री बरकतुल्ला खान थे जिन्होंने भारत को आज़ाद कराने में बहुत बड़ा योगदान दिया| हालाँकि इनका नाम हमारे स्कूल के सिलेबस में नही दर्ज है लेकिन अगर अपनी समझ और अध्ययन का दायरा बढ़ाये तो भारत के पहले प्रधानमन्त्री का नाम आता है- बरकतुल्ला खान|

बरकतुल्ला खान का निजी जिंदगी का सफ़र

7 जुलाई 1854 को बरकतुल्ला खान का जन्म हुआ था और उनकी जन्मभूमि थी भोपाल| इनका जन्म बेहद सम्पन्न परिवार में हुआ था जहा किसी चीज़ की कोई कमी नही थी| इतिहास की माने तो बरकतुल्ला के पिता मुंशी कुदरतुल्ला भोपाल रियासत में ही काम करते थे| बरकतुल्ला ने अपनी शुरुवाती शिक्षा भोपाल के ही सुलेमानिया स्कूल में हासिल की थी जहाँ उन्हें अरबी और फ़ारसी भाषाओ का भी ज्ञान हुआ था|source

इसके बाद जब इनके माता पिता का निधन हो गया और बहन की शादी हो गयी तो बरकतुल्ला भोपाल छोड़ कर मुंबई शहर में बस गये| यहाँ उन्हें अपनी जीविका चालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी जिसके चलते ये बच्चो को ट्यूशन भी देने लगे| बरकतुल्ला ने यहाँ अंग्रेजी सीखी जिसके बाद आगे की तालीम लेने वे इंग्लॅण्ड चले गये|

इंग्लैंड से साधा अंग्रेजो पर निशाना

बरकतुल्ला के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव इंग्लैंड जाकर ही आया था जहा उन्होंने द क्रिसेन्ट और पत्रिका द इस्लामिक वर्ल्ड के लिए बतौर सह संपादक काम किया| यहाँ उनकी मुलाकात उन क्रांतिकारियों से हुई जो वह रहते हुए भारत की आजादी के लिए काम कर रहे थे| भारत को आज़ाद कराने के संकल्प को लेकर बरकतुल्ला स्वदेश लौट आये जहा उनकी मुलाकात हुई राजा महेंद्र प्रताप से|source

इस मुलकात का अंजाम ये निकला की बरक्तुला खान का जापान जाना तय हुआ जो उस समय अंग्रेजो से लड़ने का क्रांतिकारियों का अड्डा माना जाता था| वहां पर बरकतुल्ला शिक्षक के तौर पर काम करने लगे और क्रांतिकारियों को भारतीय भाषाओ की तालीम देने लगे| लेकिन दुर्भाग्य से अंग्रेजी जासूसों को इस बात की भनक लग गयी और इन्हें जापान छोड़ अमेरिका जाना पड़ा|

जब वो हिन्दुस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने

बात 1915 की है जब बरकतुल्ला अपने मित्र राजा महेंद्र प्रताप के साथ अफगानिस्तान के काबुल में पहुचे जहा पर उन्होंने भारत की अंतरिम सरकार का गठन किया| इस दौरान बरकतुल्ला खान ने प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और राजा महेंद्र प्रताप ने राष्ट्रपति पद की| इसके बाद बरकतुल्ला खान रूस चले गये जहाँ पर क्रेमलिन शहर में उनकी मुलाकात लेनिन से हुई| यहीं से उन्होंने २ साल तक क्रांति को हवा दी|source

इसके बाद बरकतुल्ला ब्रसेल्स चले गये जहा पर उन्होंने साम्राज्य विरोधी सम्मलेन में हिस्सा लिया| सन 1927 में वे जर्मनी से अमेरिका आ गये जहाँ उन्ही तबियत ख़राब होने लगी| और फिर एक ऐसा दिन आया जब बरकतुल्ला जैसे क्रन्तिकारी को अलविदा कहना पड़ा| 27 सितम्बर 1927 को बरकतुल्ला खान का अमेरिका के शहर कैलिफोर्निया में इंतकाल हो गया|

नोट: दोस्तों आखिर क्यों देश के इस शख्स को समय के साथ भुला दिया गया? क्या इसमें भी किसी ने राजनीति की? हमे अपनी राय नीचे कमेंट कर जरुर दें और इस खबर को भी शेयर करे.

Related Posts

{ 0 comments… add one }

Leave a Comment