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फांसी देने से पहले कैदी के कान में जल्लाद कहता है ये तीन शब्द..क्या आप जानते है इसका रहस्य?

फंसी के सीन को कई बार फिल्मो में फिल्माया गया है और सिर्फ वही से लोग अंदाजा लगाते है की हकीक़त में फांसी कुछ इस प्रकार से दी जाती होगी| जबकि असल में फांसी की प्रक्रिया बहुत सावधानी से दी जाती है और उसमे कई नियमो का पालन होता है| आज हम आपको फांसी से जुड़े 5 तथ्य बता रहे है:

1. क्या कहता है जल्लाद कैदी के कानो में

यह बात बेहद कम लोग ही जानते है की फांसी देने के पहले जल्लाद उसके कानो में कुछ शब्द कहता है| दरसल जल्लाद एक ऐसा व्यक्ति है जिसे एक अपराधी को मारने की जिम्मेदारी सौपी जाती है| न चाहते हुए भी उसे अपनी जिम्मेदारी निभानी पडती है| इस दौरान एक प्रकिया होती है जिसे वो निभाता है.source

जल्लाद कहता है “मुझे माफ़ कर दो, मैं हुक्म का गुलाम हु, मेरा बस चलता तो मैं आपको जीवन देकर सत्यमार्ग पे चलने की कामना करता|”

अगर कैदी मुस्लिम है तो वो उसे ‘सलाम’ कहता है और यदि कैदी हिन्दू है तो वो उसे ‘राम राम’ कहता है| इसके बाद ही वो उससे माफ़ी मांगते हुए आगे के शब्द कहता है| इतना कहते ही वो फांसी का फंदा खीच देता है और व्यक्ति की मौत हो जाती है|

2. कितनी देर के लिए लटकाया जाता है फंसी के फंदे मेंsource

इसका कोई निर्धारित समय नही है| 10 मिनट बाद डॉक्टर का पैनल फांसी के फंदे में ही चेकअप कर सुनिश्चित करता है की कैदी मृत है या नहीं| इसके बाद ही उसे फंदे से निकाल कर आगे की प्रक्रिया की जाती है|

3. क्या है फांसी का समयsource

फांसी का समय सूर्योदय के पहले का ही होता है जब सब लोग नींद में होते है| जेल प्रशासन के काम सूर्योदय के बाद शुरू हो जाते है जिस कारण फांसी उससे पहले दी जाती है| जेल प्रशासन के काम प्रभावित न हो इसलिए ऐसा किया जाता है|

4. कुल कितने जल्लाद है इस देश में और कितनी तनखाह मिलती है इन्हें?source

एक बात जानकर हैरानी होगी की इतने बड़े देश में फांसी की सजा देने वाले सिर्फ दो ही जल्लाद है जिसे सरकार द्वारा मारने की सैलरी दी जाती है| किसी की जान लेना कोई आसान काम नहीं होता है, अपने सामने किसी को मरते देख कोई भी डिप्रेशन में जा सकता है| लेकिन जल्लाद इस काम को बखूबी निभाता है क्योकि सिर्फ वही इसे कर सकता है|

एक आम इंसान को फांसी देने के लिए सरकार 3000 रूपए देती है और वही एक आतंकवादी को फांसी देने के लिए सरकार जल्लाद को 25000 रूपए देती है|

5. सरकार कितने में खरीदती है फंसी का फंदाsource

फांसी का फंदा सिर्फ और सिर्फ बिहार के बक्सर में ही बनाया जाता है जहा के कैदी ही इसे तैयार करते है| यह प्रक्रिया अंग्रेजो के शासनकाल से चली आ रही है| फांसी के फंदे को लेकर भी मापदंड तय किये गये है| फंदे की रस्सी की मोटाई डेढ़ इंच से ज्यादा मोती रखने के निर्देश होते है| हालाँकि, इस फंदे की कीमत कम ही रखी गयी है| आज से दस साल पहले फांसी का फंदा 182 रूपए में जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था|

नोट: दोस्तों क्या ये अग्रेजों के काल से चली आ रही ये प्रक्रिया सही है? हमे अपनी राय नीचे कमेंट कर जरुर दें और इस खबर को भी शेयर करे.

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