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सावधान! अगले 10 दिनों में ये सभी जरुरी चीजे नहीं मिलेगी बाज़ार में, आज ही खरीद कर रख ले घर में

नोटबंदी के बाद देश में जो हाहाकार मचा था उसका शोर अब भी कानो में गूंजता है, कुछ ऐसा ही संकट एक बार और आने की आशंका जताई जा रही है| पूर्ण कर्जमाफी और फसलो की न्यूनतम समर्थन मूल्य की लगत का डेढ़ गुना करने की मांग को लेकर अब किसान सरकार से आर पार की लडाई लड़ेगा|इसके अंतर्गत किसान लोग 1 जून से 10 जून तक शहरों में दूध सब्जी आदि खाने के सामान की सप्लाई रोक देंगे| इस विरोध की शुरुवात सोशल मीडिया से शुरू भी हो चुकी है और इसकी कमान भी किसानो के बच्चो के हाथ में है|

किसानो का विरोध सरकार से ज्यादा जनता पर भारी पड़ सकता है

इस विरोध की मुहीम ट्विटर अकाउंट बनाकर शुरू की गयी है जो सिर्फ 19 मिनट में टॉप ट्रेंडिंग में पहुच गयी| मेरठ के युवा किसान भी इस मुहीम में शामिल है| ये वो लोग है जो दिन के वक़्त कॉलेज और विद्यालय में पढने जाते है और शाम होते ही घर की ओर लौटते है| विशेषकर ये ही लोग इस मुहीम को आगे बढ़ा रहे है|source

अब तक ट्विटर में किसानो के फसलो की बर्बादी, कर्ज के बोझ में आत्महत्या और किसानो की दुर्दशा पर खबरे शेयर की है| इस मुहीम में पहले तो उत्तर प्रदेश के किसान ही शामिल थे लेकिन बाद में पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, केरल, हिमाचल प्रदेश आदि से भी किसान जुड़ चुके है|

मोदी सरकार को माननी होंगी किसानो की ये मांगे

मेरठ से किसान एकता मंच के नवीन प्रधान ने यह कमान संभाली हुई है जो ट्विटर पे आये दिन इस मुहीम को और भी तेज़ कर रहे है| बहरहाल मीडिया से बात करते हुए नवीन ने जानकारी दी की यह आन्दोलन किसानो की पूर्ण कर्ज माफी, फसलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य व किसानो की आय सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है|source

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेन्द्र टिकैत ने कहा की किसानो के इस आन्दोलन में वह उनके साथ है| सोशल मीडिया पे यह मुहीम एक अच्छी शुरुवात है| किसानो के बच्चे अब अपने अधिकारों को लेकर काफी जागरूक हो चुके है| 10 दिनों के लिए शहरों में सब्जी और दूध की सप्लाई रोकी जाएगी| यह सरकार को चेतावनी देने के लिए है|

नोट: क्या जिस देश में अच्छे दिन आ जाते है वहां का किसान इस तरह के विरोध प्रदशर्न के लिए मजबूर होता है? आपका क्या जवाब है?

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