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पीएम मोदी और स्मृति ईरानी के बीच आई दरार, मोदी के इस फैसले के बाद स्मृति देंगी इस्तीफ़ा..!

स्मृति ईरानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रीमंडल की वो नेता है जो कई बार चुनाव हार जाने के बावजूद भी कई मंत्रालय संभाल चुकी है| बहरहाल बात उनके राजनीतिक सफ़र की नही बल्कि एक ऐसे फैसले की जिसे बाद में खुद नरेंद्र मोदी को पलटना पड़ा| स्मृति ईरानी इन दिनों सूचना प्रसारण मंत्रालय का प्रभार सम्भाल रही है|source

स्मृति ईरानी ने हाल ही में जो फैसला लिया उससे वो आसानी से उन पत्रकारों को रोक सकती थी जो उनके या उनकी पार्टी के गलत फैसलों की कड़ी निंदा करते है|

प्रधानमंत्री मोदी ने पलटा स्मृति ईरानी का ये बड़ा फैसला

फर्जी खबरों की रोकथाम के लिए स्मृति ईरानी ने फैसला लिया था की यदि कोई पत्रकार दुष्प्रचार या फर्जी खबरे फैलाते पकड़ा गया तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जायेगी| इस फैसले को बाद में मोदी सरकार ने प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया पे छोड़ दिया| लम्बे अरसे से मोदी मंत्रिमंडल में आपसी तालमेल की खासी कमी नज़र आ रही है| उदाहरण के तौर पे सुब्रमनियम स्वामी ने मोदी सरकार के तनखा न लेने का फैसला अस्वीकार कर दिया था और इसके अलावा भी कई मंत्रियों में असंतोष नज़र आता है|source

फ़र्जी खबरों को लेकर स्मृति ने लिया था फैसला

सोमवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से कहा गया था की अगर कोई पत्रकार झूठी खबरे फैलाता पकड़ा गया तो उसकी मान्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी| सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि,

“पत्रकारों की मान्यता के संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक अगर फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पहली बार ऐसा करते पाए जाने पर पत्रकारों की मान्यता छह महीने के लिए रद्द कर दी जाएगी”

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इसके आगे मंत्री साहिबा की ओर से ये भी कहा गया था कि,

“यदि दूसरी बार भी फर्जी खबरों का सिलसिला जारी रहा तो पत्रकार को एक साल के लिए निलंबित कर दिया जायेगा| और ऐसा तीसरी बार होने पर पत्रकार हमेशा के लिए भी निलंबित कर दिया जा सकता है”

स्मृति ईरानी को पीएम मोदी ने दिया बड़ा झटका

स्मृति के इन निर्देशों के बाद प्रधानमन्त्री ने यह कार्य प्रेस काउंसिल पर छोड़ दिया, इसकी जानकारी न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने ट्वीट कर दी| 

स्मृति अब तक अपने काम को लेकर रही फेल

बहरहाल, बीजेपी पहले से ही आरक्षण जैसे तमाम मुद्दों पर फसी हुई है जिस कारण वो एक नयी मुसीबत को न्योता देने से भी बच रही है| अभी के लिए मीडिया पर लगाम कसने की ये कोशिश स्मृति ईरानी की विफल हो चुकी है|

नोट: क्या स्मृति ईरानी अपने इस निर्देश से मीडिया और पत्रकारों का मुह बंद करना चाहती थी? आपकी क्या राय है?

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