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जब एक धमाके में देश ने अपने उस कद्दावर नेता को खो दिया जिसने बदल कर रख दी थी देश की राजनीति

हाल ही में पूरे देश ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को उनकी पुन्यतिथि पर नमन किया और उनके द्वारा इस देश के लिए किये गये कार्यो को याद किया| राजीव गाँधी देश के लोकप्रिय नेताओ में से एक थे| इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वे प्रधानमन्त्री बने थे| राहुल गाँधी ने अपने पिता राजीव गांधी को याद करते हुए ट्विटर पे लिखा ‘उन्‍होंने हमेशा सिखाया कि कभी किसी से नफरत नहीं करनी चाहिए। इस मौके पर उनकी समाधि वीर भूमि पर कांग्रेस के अध्‍यक्ष समेत कई दूसरे नेताओं ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं।source

राजीव गाँधी बेहद साफ़ छवि वाले नेता थे

राजीव गाँधी का पूरा नाम राजीव रत्न गांधी था जिनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था| इसके अलावा राजीव गाँधी एक साफ़ सुथरी शक्सियत वाले नेता थे जिन पर कभी भी भ्रष्टाचार और अन्य तरह के अपराधो का इलज़ाम लगा| राजीव गाँधी ने स्कूली शिक्षा देहरादून से की थी| इसके बाद राजीव गांधी लंदन चले गये थे जहाँ से उन्होंने आगे की शिक्षा ली|

भारत आने के बाद राजीव ने व्यावसायिक पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया और 1968 से इंडियन एयरलाइन्स में काम करने लगे| आइये जानते है राजीव गाँधी से जुड़े कुछ जरूरी घटनाए|source

श्रीलंका में क्यों हुआ था राजीव गांधी पर हमला..?

साल 1987 में राजीव गाँधी जब श्रीलंका गये थे तब उन पर हमला हुआ था जिसकी पूरे देश में कड़ी निंदा हुई थी| यह हमला श्रीलंकाई नौसेना के जवान विजीत रोहाना विजेमुनी ने राइफल की बट से उस वक़्त किया था जब श्रीलंका में शांति सेना भेजने के बाद राजीव गाँधी वहा के दौरे पे गये थे| इस दौरान गार्ड ऑफ़ ओनर का निरिक्षण करने के दौरान राजीव गाँधी सैनिको के काफी करीब पहुच गये थे, तभी उसने यह हमला किया| हालाँकि राजीव गांधी के सुरक्षाकर्मी की सजगता से वह इस हमले में बाल बाल बच गये थे| इसके बाद उसे गिरफ्तार कर उसका कोर्ट मार्शल किया गया|source

जब दवाब में छोड़नी पड़ी प्रधानमंत्री की कुर्सी

1989 में उन्होंने प्रधानमन्त्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन वह कांग्रेस पार्टी के नेता पद पर बने रहे| उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय सेना द्वारा बोफोर्स तोप की खरीदारी में लिए गये कमीशन का मुद्दा उछला| इसके बाद अगले चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और राजीव को प्रधानमन्त्री पद से हटना पड़ा|source

राजीव गाँधी की हत्या

राजीव गांधी ने अपने प्रधानमन्त्री काल में श्रीलंका में शान्ति प्रयासों के लिए भारतीय सैन्य टुकडियो को भी वह भेजा, लेकिन इसके नतीजे में वे खुद लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ऐलम के निशाने पर आ गये| तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में उन्हें उस वक़्त बम से उड़ा दिया गया था जब वो एक चुनावी रैल्ली को सम्बोधित कर रहे थे|

21 मई 1991 को रात तकरीबन 10 बजकर 10 मिनट  पर राजीव गांधी उस जगह पहुचे|

आत्घाती हमले में गवाई जान

मंच की ओर बढ़ते हुए एक महिला उनका अभिवादन करने के लिए आगे बढ़ी| उस महिला का नाम धनु था और उसने आत्घाती बेल्ट पहनी हुई थी| धनु जैसे ही राजीव गांधी को माला पहनाने के लिए उनकी ओर बढ़ी वैसे ही सब इंस्पेक्टर अनसुइया ने उसे रोक दिया| लेकिन राजीव गाँधी ने धनु को आने दिया|source

धनु जैसे ही नीचे की ओर झुकी वैसे ही एक जोर का धमाका हुआ और सबकुछ सुन्न हो गया| और इस धमाके ने राजीव गांधी को हमेशा के लिए इस देश से दूर कर दिया| राजीव गांधी के हत्यारे प्रभाकरण ने जो जख्म इस देश को दिया उसका दर्द आज भी बरकरार है|

नोट: आपकी नज़र में राजीव गाँधी कैसे नेता थे? हमे अपनी रय नीचे कमेंट कर जरुर दें और इस खबर को भी शेयर करे.

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