≡ Menu

16 आतंकियों को मौत के घाट उतारा इस दबंग लेडी IPS ने! अब करने जा रही हैं ये बड़ा काम

समाज में एक ऐसी महिला पुलिस अधिकारी सामने आई है जिसने अपने कहर से आतंकवादियों के छक्के छुड़ा रखे है| ये एक ऐसी महिला अफसर है जिहोने अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा से आतंकवाद पर नकेल कस रखी है| आईपीएस संजुक्ता पराशर का नाम आज उन चुनिन्दा अफसरों में लिया जाता है जिन्होंने देश को आतंकियों से मुक्त कराने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है|

तो आईये कुछ और जानते है लेडी आईपीएस ऑफिसर संजुक्ता पराशर के बारे में!source

संजुक्ता पराशर असम की पहली महिला आईपीएस अधिकारी है

संजुक्ता को लेडी दबंग होने के साथ साथ एक और गौरव प्राप्त है और वो ये की संजुक्ता असम की पहली महिला आईपीएस अधिकारी है| इसके अलावा संजुक्ता को महज पंद्रह महीने लगे थे 64 आतंकियों को धर दबोचने में जिनमे से 16 को उन्होंने मौके पर ही मार गिराया| इन्हें असम की आयरन लेडी भी कहा जाता है|source

संजुक्ता पराशर 2006 बैच की आईपीएस अफसर है| इन्होने यूपीएसई की परीक्षा में 85वीं रैंक हासिल की थी और उसके आईपीएस को ही अपनी राह बनायीं थी| आईपीएस बनने का ख्वाब संजुक्ता ने तभी से देखा था जब वो स्कूल के दौरान अपने राज्य में आतंकवादियों के कहर से दुखी थी| अच्छी रैंक आने के बावजूद उन्होंने अपने राज्य असम को ही चुना और मेघालय-असम काडर को तवज्जो दी|source

64 आतंकवादियों को जेल पहुंचाया और 16 का किया एनकाउंटर

असम में पोस्टिंग के दौरान उनका सामना बोडो उग्रवादियों से हुआ जिनके खिलाफ चलाये गये ऑपरेशन में उन्हें बड़ी सफलता हासिल हुई| इसी ऑपरेशन में उन्होंने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए 64 आतंकवादियों को जेल के सलाखों के पीछे पहुचाया और 16 को मौत के घाट उतारा| उनकी पहली पोस्टिंग साल 2008 में माकुम में हुई थी, यहाँ वह असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर नियुक्त की गयी थी| संजुक्ता को हाल ही में भोपाल-उज्जैन ट्रेन ब्लास्ट की जांच भी सौपे गये है|source

संजुक्ता के पति पुरु गुप्ता भी एक आईएएस ऑफिसर है, इसके अलावा उनका एक बेटा भी है जिसका ख्याल उनकी माँ करती है| संजुक्ता की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में पीजी किया है और फॉरेन पॉलिसी में पीएचडी हासिल की है|

नोट: देश की असल बागडोर नेताओ के हाथ में नहीं बल्कि संजुक्ता पराशर जैसे नौकरशाहों के हाथो में ही होती है और यदि ये दुरुस्त रहे तो कानून व्यवस्था भी चाकचौबंद रहती है| वरना भ्रष्टाचार जैसा दीमक नौकरशाही को भी दिन ब दिन खोखला किये जा रहा है और लोगो का इन पर से भरोसा ही उठता नज़र आ रहा है| लेकिन संजुक्ता जैसे कुछ अफसर इसकी साख आज भी बचाए हुए है|

Related Posts

{ 0 comments… add one }

Leave a Comment