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फांसी की सजा देने के बाद पेन की निब क्यों तोड़ दी जाती है? जानिये निब का फांसी कनेक्शन

फांसी की सजा रेयरस्ट ऑफ़ रेयर मामले में ही दी जाती है और ये दुनिया में सबसे बड़ी सजा मानी गयी है| भारत में साल 2004 से 2013 के बीच कुल 1303 लोगो को फांसी की सजा सुनाई गयी है, यह आंकड़े नेशनल क्राइम बुय्रो द्वारा दिए गये है| लेकिन बहुत कम लोग ही इसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में जानते है|source

क्या आप जानते है की जब भी कोई जज किसी अपराधी को फांसी की सजा सुनाता है तो वो अपने पेन की निब तोड़ देता है| सजा हमेशा रात को ही दी जाती है| फांसी देने वाला जल्लाद अपराधी के कान में कुछ कहता है, लेकिन क्या? फांसी का फंदा कहा से और कौन बनाता है? आयिए जाने इन सवालो के बारे में!

1. फांसी की सजा सुनाने के बाद जज अपने पेन की निब तोड़ देता है

अक्सर यह सीन आप फिल्मो में देखते आये होंगे जब कोई जज द्वारा किसी अपराधी को सजा देने के बाद, पेन की निप तोड़ देता है| लेकिन यह फिल्मी सीन नही है, ऐसा हकीक़त में भी होता है| सुनवाई के बाद जब जज फांसी की सजा सुनाता है तो वो पेन की निप तोड देता है और ऐसा करने के पीछे सवैधनिक कारण है| दरअसल एक बार सजा सुनाने के बाद खुद जज भी इस फैसले को बदल नही सकता| दूसरा इस पेन द्वारा किसी की जिंदगी खत्म की गयी है तो उससे कोई दूसरा काम नहीं होगा|source

फांसी की सजा देते वक़्त जेल अधीक्षक, मजिसट्रेट, डॉक्टर और जल्लाद का होना जरूरी है|

2. फांसी का फंदा सिर्फ यही से ही मंगवाया जाता हैsource

अंग्रेजो के जमाने से यह चला आ रहा है की फांसी का फंदा बिहार के बक्सर जिले में कुछ कैदियों द्वारा ही बनवाया जाता है| फांसी का फंदा जिस रस्सी से बनता है वो मनिला रस्सी है| इसके अलावा बक्सर जिले में एक मशीन है जिसके द्वारा यह फंदा तैयार किया जाता है| लेकिन अपराधी के कान में यह कहे बिना उसे फांसी नहीं होती|

3 अपराधी के कान में जल्लाद को कहने होते यह शब्दsource

फांसी की सजा पाने वाले अपराधी के कान में जल्लाद कहता है- मुझे माफ़ कर दो, मैं हुक्म का गुलाम हु, मेरा बस चलता तो मैं आपको जीवन देकर सत्यमार्ग पे चलने की कामना करता| फांसी हमेशा रात को ही दी जाती है जिससे इसका असर बाकी कैदियों और प्रशासन के कामकाज पे न हो|

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